Friday, October 30, 2009

hisab--kitab


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बचपन से ही वह मौखिक गणित में तेज था /  स्कूल का प्रोग्रेस कार्ड बड़ी ख़ुशी से दौड़ दौड़ कर अपने माता पिता को दिखाता था अ पने प्राप्तांको को देख देख कर बहुत खुश होता था आगे  कालेज में भी अपना हिसाब ,अंको का ,प्राप्तांको का ,डिविजन ,का मेरिट लिस्ट का ,बरकरार रखा  / भविष्य के प्रति निष्ठावान ,नौकरी में भी अपना परचम फहराना शुरू कर दिया ,अपने प्रमोशन ,अपनी कमी , बगैर किसी संकोच के अपने माता -पिता ,भाई बहनों को वक्त -बेवक्त बताता रहता /जिन्दगी आगे जैसे जैसे बढती गई हिसाब किताब अपनी बैंक की बचत ,,जमा खर्च ,अपना इनवेस्टमेंट ,सब कुछ ख़ुशी ख़ुशी अपने माता-पिता भाई बहनों को बताता /किसी की प्रतिक्रिया से बेखबर अपनी  खुशियों  में सब को शामिल करता /वक्त गुजरता गया ,एअक दिन माता -पिता भी छोड़कर चले गए ,परन्तु हिसाब किताब चालू रहा ,अब वह अपना हिसाब किताब अपनी बीबी ,बच्चो के साथ शेयर करेने लगा ,विरासत में मिली आदत अपने बच्चो को जिन्दगी के फ्न्द्दे ,और भविष्य की निश्चिंत ता समझाता, और खुश होता /उम्र बढती गई बच्चे बड़े होते गए ,,,अच्छी शिक्षा से नौकरियों में ,अच्छी पदों परपदस्थ  हो गए ,,दो लड़के थे दोनों बम्बई ,बंगलौर ,चले गए /अब तीज त्यौहार पर,,,होली दिवाली पर आते है ,,त्यौहार मनाते है ,,,मुलाकात होती है ,,बात होती है ,,उसे उत्सुकता बनी रहती है बच्चो के हिसाब -किताब जान लेने की ,,,प्रोग्रेस कार्ड पर बैंक बलंस की ,,सेलेरी पर इन्क्रीमेंट की ,,पर अफ़सोस दोनों बच्चे इन विषयों पर उदासीन ,चुप्पी साधे रहते /कारण खुदा जाने ???अब वो सेवा निवृत हो गया है ,,,उसका हिसाब -किताब पर पूर्ण विराम लग गया   है /पिछले कुछ दिनों से उसका विश्वास हिसाब-किताब से उठ गया है,,,अब वो सिर्फ पाच तारीख का इन्तजार करता है उस दिन उसे हर महीने पेंसन मिलती है ,,पेंसन की रकम तो उसे पूरे हिसाब से मिलती है मगर वो उसे मिलते ही बे हिसाब खर्च कर देता है ,,,उसकी जिन्दगी के पन्नो का हिसाब अब हासिये पर जा चका है ,,,जिन्दगी की मिलकियत  शुन्य  से शुरू हुई थी ,,और आज उसके सरे हिसाब -किताब का प्राप्तांक भी शुन्य ही रहा ???