Monday, July 6, 2009

निमाड़ी बिदाई लोक गीत

फुलड़डा विनंती तू चली हो लड़क्ली
अपना पिताजी का बाघ म
कछु बिनीआ कछु बिनवा हो लागाया
इतरा म आया दुल्ल्हो रावोजी
उठो लड़कली तुम बठो पलखडी चलो ते अपना देश जी
जब हमरा पिताजी वर परख से तव जाई जावां तुम्हरा साथ जी
जव हमरा दादाजी दैजओ संजोव तवं जाईइ जवाँ तुम्हारा साथ जी
जव हमरी माय जो कूख पूऊजाव तव जाई जावा तुम्हरा साथ जी
जव हमरा भाई जो डोली संजोवा तव जाईइ जावा तुम्हरा साथ जी
काही ख प्आली रे बाबुल काहे ख पोसी काहे पिलायो काचो दूध जी
माया ख पलएई रे बाबुल माया ख पोसी ममता पिलायो काचो दूध जी
फूलडा ....................................

5 comments:

शोभना चौरे said...

kamnaji aapka nimadi geet achha lga agar aap hindi me bhi iska arth bta de to smjhne me suvidha rhegi.
dhnywad

अमिताभ श्रीवास्तव said...

wah ji wah, mahino baad NIMADI suni...
par samajh me jyada nahi aati, shobhnaji ne jo kaha usase me sahmat hu, agli baar hindi anuad sahit koi nimadi post.

शोभना चौरे said...

tippni ke liye dhnywad .

शोभना चौरे said...

बिदाई गीत का भावार्थ इस प्रकार है |जिस तरह सीताजी देवी पूजनके लिए बाग में फुल बीनने जाती हैऔरवहां उन्हें श्री रामजी मिलते है |उसी के संदर्भ में गीत के भावः है वधु अपनेपिताजी के बाग में फूल चुनने जाती है ,तभी वहां वर भी आ जाता है और वधु से कहता है- हे पिता की लाडली !पालकी तैयार है तुम बैठो और मेरे साथ चलो |
तब वधु कहती है -मई ऐसे कैसे जा सकती हूँ -
जब तक मेरे दादाजी वर को परखेगे तब मै तुम्हारे साथ जाउंगी |
जब मेरे पिताजी दहेज संजोवेगे तब मै तुम्हारे साथ जाउंगी |
जब मेरे जीजाजी मंडप छायेगे ,तब मै तुम्हारे साथ जाउंगी |
जब मेरा भाई डोली सनजोवेगा ,तब मै तुम्हारे साथ जाउंगी |
जब मेरी माँ कूख को पुज्वाएगी ,तब मै तुम्हारे साथ जाउंगी |
वधु फ़िर अपनी माँ से कहती है ,जब मुझे विदा करना ही था तो पालपोस के बड़ा क्यो किया क्यो प्यार से बडा किया |
तब माँ कहती है माया से पाला पोसा है और ममता का कच्छा दूध पिलाया है ,पर बेटी यही जमाने की रीत है |

Mukesh Shandilya "Chirag" said...

apaka nimadi geet achchha laga